पांच अन्य किसान साथियों के साथ क्लस्टर बनाकर चार एकड़ एरिया में कर रहे हैं खेती

12 लोगों को मुहैया करवा रहे हैं रोज़गार।

प्रदेश के अधिकतर किसान-बागवान आज भी परम्परागत खेती कर रहे है जोकि सारा साल मौसम पर निर्भर रहते हैं। लेकिन मौसम की बदलती परिस्थितियों के बाद अब किसानों का रुझान आधुनिक तकनीक से खेती करने की ओर बढ़ा है। ऑफ सीजन सब्ज़ियों की बाजार में बढ़ती मांग और अच्छे दाम मिलने पर अब ग्रीनहाउस और पॉली हाउस जैसी तकनीक को अपनाकर किसान-बागवान बेमौसमी फल व सब्जियाँ उगाकर अच्छा उत्पादन व मुनाफा कमा रहे हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन चलाया जा रहा है। जिसके तहत किसानों-बागवानों को पॉलीहाउस लगाने के लिए 85% अनुदान प्रदान किया जा रहा है ।
जिला कांगड़ा के इंदौरा ब्लॉक के इंदपुर से सम्बंध रखने वाले चेतन ठाकुर एक ऐसे ही बागवान हैं जिन्होंने इस योजना से लाभ लेकर पॉलीहाउस लगाया, जिससे वह बेमौसमी सब्जियों का अच्छा उत्पादन कर आज लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं।
चेतन ठाकुर ने होटल मैनेजमेंट की डिग्री लेने के बाद बड़े-बड़े होटलों में चार साल तक काम किया लेकिन वह अपने प्रदेश में ही अपना कारोबार शुरू करने के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोज़गार उपलब्ध करवाना चाहते थे। उनके पिता कृषि से सेवानिवृत्त हुए हैं जिसके कारण शुरू से ही चेतन शर्मा की खेतबाड़ी में गहरी दिलचस्पी थी। अपने पिता से प्रेरणा लेकर उन्होंने कृषि क्षेत्र में ही अपना रोजगार शुरू करने का मन बनाया।

विभाग से मिली सब्सिडी
चेतन ठाकुर को पॉलीहाउस लगाने में बागवानी विभाग द्वारा 85 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की गई है। इसके अलावा सोलह हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में स्वचलित सिंचाई सुविधा लगाने पर 80 प्रतिशत, पॉवर टिलर पर 50 प्रतिशत,ग्रेडिंग मशीन पर 2 लाख 50 हजार,वाटर स्टोरेज टैंक पर 50 प्रतिशत तथा अन्य कृषि उपकरणों पर अनुदान प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सब्सिडी तथा प्रशिक्षण के बिना संरक्षित खेती करना अत्यंत मुश्किल काम है। इसके साथ ही हर पांच साल बाद पॉलीहाउस की शीट बदलने में भी सरकार द्वारा 80 प्रतिशत अनुदान दिया गया।

पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना ज्यादा मुनाफा
चेतन ठाकुर पॉलीहाउस में फरवरी से सितंबर माह तक खीरा तथा अगस्त से जून के सीजन में लाल-पीली शिमला मिर्च का उत्पादन करते हैं। वह सीजन में दो एकड़ जमीन से सोलह सौ क्विंटल खीरा तथा 2 एकड़ जमीन से 500-500 क्विंटल लाल व पीली शिमला मिर्च का उत्पादन करते हैं। इसके अलावा सर्दियों के मौसम में पॉलीहाउस के बीच की खाली जगह पर ब्रोकली तथा लैट्यूस(सलाद पत्ती)का उत्पादन करते हैं।
आज चेतन ठाकुर तथा उनका प्रत्येक किसान साथी पॉलीहाउस में सब्जियाँ उगा कर सालाना कम से कम सात-सात लाख रुपये से अधिक का मुनाफा कमा रहे हैं जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना ज्यादा है। वह स्वावलंबी बनने के साथ बारह और स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करवा रहे हैं। चेतन ठाकुर अपने व्यवसाय के क्षेत्र को निकट भविष्य में व्यापक स्तर पर बढ़ाने के लिए प्रयासरत
हैं।आज चेतन ठाकुर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं।

पॉलीहाउस में खेती के फायदे

पॉलीहाउस के अंदर का मौसम जैसे तापमान,नमी और यहां तक कीटों की उपस्थिति आदि किसान के नियंत्रण में रहती हैं, जिससे कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग कम होने के साथ इसकी देखभाल करना भी आसान हो जाता है। पॉलीहाउस में उगाए गए फल,सब्जियाँ और पौधे ताजा रहते हैं जिससे मार्किट में इनके अच्छे दाम मिलते हैं।

क्या कहते हैं बागवानी विभाग के उपनिदेशक :

बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ कमलशील नेगी का कहना है कि इस योजना के तहत राज्य सरकार किसानों को पॉलीहाउस लगाने के लिए 85 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान कर रही है। इसके अलावा सिंचाई सुविधा लगाने, पॉवर टिलर खरीदने,ग्रेडिंग मशीन की खरीद, वाटर स्टोरेज टैंक तथा अन्य कृषि उपकरणों पर 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान कर रही है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सूक्खु ने बागवानी तथा कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में नई-नई योजनाओं की शुरुआत की है । मुख्यमंत्री की इन योजनाओं और दूरगामी सोच से किसानों-बागवानों विशेषकर युवाओं को स्वरोज़गार के बेहतर अवसर प्राप्त होने के साथ अच्छी आय भी प्राप्त होगी।

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